Dhanvantari Ji Ki Aarti
Dhanvantari Ji ki aarti is a traditional devotional prayer centred on भगवान धन्वंतरि. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceJai Dhanvantari Deva
जय धन्वन्तरि देवा, जय धन्वन्तरि जी देवा
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।धन्वंतरि जी मंत्र
ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रिलोकनाथाय विष्णवे स्वाहा
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।धन्वंतरि जी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
धन्वंतरि जी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. धन्वंतरि जी, आरोग्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से संयम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सेवा का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
धन्वंतरि जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. धन्वंतरि जी, सेवा के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से आशा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
आरोग्य का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
धन्वंतरि जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. धन्वंतरि जी, आरोग्य के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से संयम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
सेवा का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
धन्वंतरि जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. धन्वंतरि जी, सेवा के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से आशा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
आरोग्य का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
धन्वंतरि जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
धन्वंतरि जी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Dhanvantari worship honours Ayurveda’s healing tradition and reminds us that health needs knowledge, care and moderation.
How to read the aarti
Keep the prayer alongside appropriate medical care and use the occasion to support a healthy, compassionate habit.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
Read on Dhanteras or as a gratitude prayer for health, healing knowledge and responsible care.
What is the traditional aarti for Dhanvantari Ji?
Jai Dhanvantari Deva is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Dhanvantari Ji Ki Aarti?
Read on Dhanteras or as a gratitude prayer for health, healing knowledge and responsible care.
What is the meaning of Dhanvantari Ji Ki Aarti?
Dhanvantari worship honours Ayurveda’s healing tradition and reminds us that health needs knowledge, care and moderation.