Guru Gorakhnath Ji Ki Aarti
Guru Gorakhnath ki aarti is a traditional devotional prayer centred on गुरु गोरखनाथ. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceJai Guru Gorakhnath
जय गुरु गोरखनाथ, जय नाथ महाराज
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।गोरखनाथ जी मंत्र
ॐ शिव गोरक्षाय नमः
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।गोरखनाथ जी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
गोरखनाथ जी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. गोरखनाथ जी, साधना के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से संयम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
जागृति का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
गोरखनाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. गोरखनाथ जी, जागृति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से गुरु-भक्ति जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
साधना का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
गोरखनाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. गोरखनाथ जी, साधना के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से संयम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
जागृति का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
गोरखनाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. गोरखनाथ जी, जागृति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से गुरु-भक्ति जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
साधना का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
गोरखनाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
गोरखनाथ जी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
The prayer honours yogic discipline, the guru principle and the responsibility to keep practice grounded in conduct.
How to read the aarti
Recite with respect for the lineage, pair worship with self-discipline and avoid miracle-based claims.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
A focused aarti page for Gorakhnath and Nath tradition remembrance.
What is the traditional aarti for Guru Gorakhnath?
Jai Guru Gorakhnath is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Guru Gorakhnath Ji Ki Aarti?
A focused aarti page for Gorakhnath and Nath tradition remembrance.
What is the meaning of Guru Gorakhnath Ji Ki Aarti?
The prayer honours yogic discipline, the guru principle and the responsibility to keep practice grounded in conduct.