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Hanuman Ji Ki Aarti

Hanuman Ji ki aarti is a traditional devotional prayer centred on श्री हनुमान. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.

Bajrang BaliMarutiAnjaneya
Devotional artwork for Hanuman Ji aartiA quiet space for prayer, gratitude and remembrance
Famous traditional aartiTitle + opening

Aarti Kije Hanuman Lala Ki

आरती कीजै हनुमान लला की

यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।
Mantra

हनुमान जी मंत्र

ॐ हनुमते नमः

साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।
Chalisa / भक्ति रचनाTraditional text

श्री हनुमान चालीसा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुण्डल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

शंकर सुवन केसरी नंदन।

तेज प्रताप महा जग वंदन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाए।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना।

लंकेश्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्र योजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रक्षक काहू को डरना॥

आपन तेज सम्हारो आपै।

तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोई अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।

जनम जनम के दुख बिसरावै॥

अंतकाल रघुवर पुर जाई।

जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

यह गोस्वामी तुलसीदास की पारंपरिक हनुमान चालीसा का प्रचलित पाठ है। परिवार या मंदिर में प्रचलित वर्तनी/पाठांतर का सम्मान करें।
पूर्ण आरतीTraditional text

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरवर काँपे।

रोग-दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।

संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए।

लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।

जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।

सियाराम जी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।

लाए संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जमकारे।

अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाईं भुजा असुर दल मारे।

दाहिनी भुजा संतजन तारे॥

सुर-नर-मुनिजन आरती उतारें।

जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।

आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।

बसहिं बैकुंठ परम पद पावे॥

लंका विध्वंस किए रघुराई।

तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

स्तुति

हनुमान स्तुति

मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

पाठ मार्गदर्शन

हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान चालीसा भक्ति, साहस, सेवा और श्रीराम के प्रति समर्पण का पारंपरिक पाठ है। इसे श्रद्धा और एकाग्रता से पढ़ें।

भक्त परंपरा में इसके नियमित पाठ को मनोबल, अनुशासन और सकारात्मक स्मरण से जोड़ा जाता है। इसे किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प न मानें।

प्रातः, संध्या, मंगलवार या शनिवार को पढ़ना प्रचलित है; सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता है।

Meaning

What this prayer remembers

Hanuman aarti honours devoted service, strength under discipline and the courage to use power for protection and good.

Simple puja vidhi

How to read the aarti

Keep the offering simple, recite with a steady voice, and pair devotion with one helpful act for another person.

  1. Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
  2. Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
  3. Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
When to read

Aarti for the right moment

Read on Tuesday or Saturday, before a demanding task or whenever courage and service need renewing.

Common questions
What is the traditional aarti for Hanuman Ji?

Aarti Kije Hanuman Lala Ki is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.

When should I read Hanuman Ji Ki Aarti?

Read on Tuesday or Saturday, before a demanding task or whenever courage and service need renewing.

What is the meaning of Hanuman Ji Ki Aarti?

Hanuman aarti honours devoted service, strength under discipline and the courage to use power for protection and good.