Jagannath Ji Ki Aarti
Jagannath Ji ki aarti is a traditional devotional prayer centred on श्री जगन्नाथ. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceJai Jagannath Aarti
जय जगन्नाथ प्रभु, जय जगन्नाथ
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।जगन्नाथ जी मंत्र
ॐ जगन्नाथाय नमः
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।जगन्नाथ जी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
जगन्नाथ जी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. जगन्नाथ जी, समावेश के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से यात्रा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
करुणा का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
जगन्नाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. जगन्नाथ जी, करुणा के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से भक्ति जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
समावेश का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
जगन्नाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. जगन्नाथ जी, समावेश के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से यात्रा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
करुणा का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
जगन्नाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. जगन्नाथ जी, करुणा के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से भक्ति जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
समावेश का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
जगन्नाथ जी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
जगन्नाथ जी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Jagannath devotion holds a strong theme of shared belonging: the Lord of the world is approached by every community.
How to read the aarti
Offer what is prepared with care, remember the temple tradition respectfully, and share food or service where possible.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
A devotional page for Jagannath worship, Rath Yatra season and household remembrance.
What is the traditional aarti for Jagannath Ji?
Jai Jagannath Aarti is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Jagannath Ji Ki Aarti?
A devotional page for Jagannath worship, Rath Yatra season and household remembrance.
What is the meaning of Jagannath Ji Ki Aarti?
Jagannath devotion holds a strong theme of shared belonging: the Lord of the world is approached by every community.