Navnath Ki Aarti
Navnath ki aarti is a traditional devotional prayer centred on नवनाथ. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceNavnathanchi Aarti
नवनाथांची आरती, भक्तिभावे गाऊ या
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।नवनाथ मंत्र
ॐ श्री नवनाथाय नमः
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।नवनाथ के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
नवनाथ का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. नवनाथ, योग के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से गुरु-परंपरा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
अनुशासन का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
नवनाथ, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. नवनाथ, अनुशासन के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से आत्मज्ञान जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
योग का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
नवनाथ, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. नवनाथ, योग के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से गुरु-परंपरा जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
अनुशासन का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
नवनाथ, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. नवनाथ, अनुशासन के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से आत्मज्ञान जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
योग का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
नवनाथ, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
नवनाथ, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Navnath devotion points to disciplined practice, guru remembrance and the search for wisdom through lived experience.
How to read the aarti
Learn the local lineage and pronunciation, keep the recitation focused, and avoid presenting one regional version as the only version.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
Read in Nath tradition contexts and during family observances connected with the Navnath saints.
What is the traditional aarti for Navnath?
Navnathanchi Aarti is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Navnath Ki Aarti?
Read in Nath tradition contexts and during family observances connected with the Navnath saints.
What is the meaning of Navnath Ki Aarti?
Navnath devotion points to disciplined practice, guru remembrance and the search for wisdom through lived experience.