Vitthal Rukmini Ki Aarti
Vitthal Rukmini ki aarti is a traditional devotional prayer centred on विठ्ठल रखुमाई. This page keeps the canonical aarti name, its opening line, meaning and a respectful daily practice together for devotees and families.
A quiet space for prayer, gratitude and remembranceYuge Aththavis Vitevari Ubha
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा
यहाँ पारंपरिक शीर्षक, प्रचलित मुखड़ा और एक प्रचलित मंत्र/लघु-आवाहन का संदर्भ दिया गया है। पूर्ण पाठ और मंत्र-पाठ परिवार, मंदिर, संप्रदाय और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं।विठ्ठल-रुक्मिणी मंत्र
ॐ विठ्ठलाय नमः
साफ और शांत स्थान पर अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जप करें।विठ्ठल-रुक्मिणी के लिए मौलिक 40-पद भक्ति रचना
विठ्ठल-रुक्मिणी का स्मरण कर, मन में जागे प्रकाश।
भक्ति, सेवा, सत्य से, जीवन हो उल्लास॥
करुणा की छाया मिले, दृढ़ हो मेरा मान।
मंगल पथ पर साथ दो, स्वीकारो यह गान॥
1. विठ्ठल-रुक्मिणी, नाम-स्मरण के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
2. तेरे स्मरण से प्रेम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
3. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
संगति का दीप हृदय में धारूँ॥
4. कर्म-पथ पर देना सहारा।
विठ्ठल-रुक्मिणी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
5. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
6. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
7. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
8. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
9. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
10. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
11. विठ्ठल-रुक्मिणी, संगति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
12. तेरे स्मरण से सरलता जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
13. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
नाम-स्मरण का दीप हृदय में धारूँ॥
14. कर्म-पथ पर देना सहारा।
विठ्ठल-रुक्मिणी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
15. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
16. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
17. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
18. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
19. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
20. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
21. विठ्ठल-रुक्मिणी, नाम-स्मरण के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
22. तेरे स्मरण से प्रेम जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
23. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
संगति का दीप हृदय में धारूँ॥
24. कर्म-पथ पर देना सहारा।
विठ्ठल-रुक्मिणी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
25. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
26. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
27. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
28. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
29. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
30. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
31. विठ्ठल-रुक्मिणी, संगति के दाता।
मन में जगाओ शुभ विचार॥
32. तेरे स्मरण से सरलता जागे।
जीवन के तम सब दूर भागे॥
33. सच्चे मन से नाम पुकारूँ।
नाम-स्मरण का दीप हृदय में धारूँ॥
34. कर्म-पथ पर देना सहारा।
विठ्ठल-रुक्मिणी, तुम हो एकमात्र हमारा॥
35. लोभ-भय से मन को बचाना।
सत्य-सेवा का पाठ पढ़ाना॥
36. घर-आंगन में मंगल लाना।
दीन जनों को गले लगाना॥
37. बुद्धि, बल और धीरज देना।
अच्छे कर्मों का फल ही लेना॥
38. दुख में रखना मन को स्थिर।
सुख में रखना भाव समुचित॥
39. जिनके जीवन में है अँधियारा।
उनके लिए बनो तुम तारा॥
40. हर प्राणी में रूप तुम्हारा।
सेवा से हो पंथ उजियारा॥
तन-मन-वचन सुधरें सभी, रहे सरल व्यवहार।
विठ्ठल-रुक्मिणी, चरणों में अर्पित यह, मेरा छोटा प्यार॥
What this prayer remembers
Vitthal bhakti centres humility, nama-smaran, community walking and the dignity of ordinary work.
How to read the aarti
Sing or recite in a group when possible, remember the Warkari spirit of equality and share food or care with others.
- Prepare a clean, calm place and light a diya safely.
- Take a breath, remember the deity and recite the traditional opening with attention.
- Close with gratitude and carry one value from the prayer into the day.
Aarti for the right moment
A devotional guide for Ashadhi Ekadashi, Warkari practice and daily Vitthal remembrance.
What is the traditional aarti for Vitthal Rukmini?
Yuge Aththavis Vitevari Ubha is the traditional aarti title most commonly associated with this devotional form. Regional families may sing a different local version.
When should I read Vitthal Rukmini Ki Aarti?
A devotional guide for Ashadhi Ekadashi, Warkari practice and daily Vitthal remembrance.
What is the meaning of Vitthal Rukmini Ki Aarti?
Vitthal bhakti centres humility, nama-smaran, community walking and the dignity of ordinary work.